Nov 22, 2010

"ययाति" उपन्यास में एक बड़ी गलती

आपलोगों ने शायद श्री विष्णु सखाराम खांडेकर द्वारा लिखा गया कालजयी उपन्यास "ययाति" पढ़ा होगा. अगर आपने नहीं पढ़ा तो मैं आपको सलाह देना चाहूँगा की आप इस उपन्यास को अवश्य पढ़े. मैंने इस उपन्यास को दो तीन बार पढ़ा है और हमेशा ही सराहा है. पुरातन काल के एक महान पात्र - "ययाति" पर नए दृष्टिकोण से लिखे इस उपन्यास की जितनी भी तारीफ की जाए कम है. पाठकों को लगता है जैसे वो स्वयं उस काल के कोई पात्र हों. मैंने इस उपन्यास से पहले श्री खांडेकर जी का कोई भी उपन्यास नहीं पढ़ा था लेकिन इस उपन्यास को पढने के बाद मैं उनकी प्रतिभा का कायल हो गया.


लेकिन इस उपन्यास में श्री खांडेकर एक बड़ी गलती कर गए हैं. उन्होंने ययाति और उनके पिता नहुष को "हस्तिनापुर" का राजा बताया है. जिन लोगों को इसके सन्दर्भ में ज्यादा जानकारी नहीं है वो जरुर कह सकते हैं कि हस्तिनापुर तो शुरू से ही आर्य वंश कि राजधानी रही है लेकिन मैं सभी पाठकों का इस ओर ध्यान आकर्षित करना चाहता हूँ कि ये तथ्य कि नहुष एवं ययाति हस्तिनापुर के सम्राट थे, पूरी तरह से गलत है.

इसकी विस्तृत जानकारी के लिए कृपया मेरे धर्म संसार ब्लॉग के इस पोस्ट को पढ़ें. यहाँ पर आप देखेंगे कि ब्रह्मा से नवी (९) पीढ़ी में ययाति का जन्म हुआ. शायद उस समय तक वो पूरा साम्राज्य आर्यावर्त ही कहलाता होगा, हालाँकि इसका कोई ठोस प्रमाण नहीं है. आगे आप देखेंगे कि ब्रह्मा से इकत्तीसवी (३१) पीढ़ी में महाराज हस्ती का जन्म हुआ जिनके नाम पर ही सारे प्रदेश का नाम "हस्तिनापुर" पड़ा.

इसका मतलब ययाति से बाईस (२२) पीढ़ी के बाद ही पूरे प्रदेश का नाम महाराज हस्ती के नाम पर "हस्तिनापुर" पड़ा. इसलिए श्री खांडेकर द्वारा महाराज नहुष और महाराज ययाति को हस्तिनापुर का सम्राट बताना गलत है. एक और बात जो इसमें गलत है वो ये कि इस उपन्यास में बताया गया है कि पुरु ययाति एवं शर्मिष्ठा का प्रथम पुत्र था जो कि सत्य नहीं है. पुरु के पहले ययाति के शर्मिठा से दो पुत्र और थे द्रुहू एवं अनु. पुरु उन दोनों के सबसे कनिष्ठ पुत्र थे. उनसे एक बहुत ही निर्दोष गलती हुई है, हालाँकि इससे "ययाति" जैसे कालजयी उपन्यास की प्रतिष्ठा एवं महत्व पर कोई फर्क नहीं पड़ता.