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Friday, February 12, 2010

कपैसिटर

कपैसिटर का इस्तेमाल लगभग सारे इलेक्ट्रोनिक सर्किट में होता है. कैपेसिटर चार्ज जमा करता है और फिर इसे धीरे धीरे खर्च करता है. उदाहरण के तौर पर आप ये सोचिये कि हम पानी कि टंकी क्यों इस्तेमाल करते है ताकि हम इसमें पानी जमा कर सकें और फिर अपनी जरुरत के हिसाब से उसे खर्च कर सके, यही काम कपैसिटर भी करता है. ये पहले अपनी अधिकतम क्षमता तक चार्ज होता है और उसके बाद डिसचार्ज होता है. कपैसिटर मुख्यतः दो तरह के होते हैं: AC और DC. इसके आलावा इसे हम पोलर और नॉनपोलर कपैसिटर में बाँट सकते हैं. नॉनपोलर कपैसिटर वो होते हैं जिसे हम सर्किट में किसी भी प्रकार लगा सकते हैं लेकिन पोलर कपैसिटर में +ve और -ve पॉइंट होता है और सर्किट में इसे लगते हुए हमें इसका ध्यान रखना पड़ता है कि हम इसे उल्टा न लगा दें. सेरामिक कपैसिटर नॉनपोलर कपैसिटर होते हैं और पोलर कपैसिटर को हम इलेक्ट्रोलाइटिक कपैसिटर कहते हैं. कपैसिटर सामान्यतः AC को रोक देता है और DC को जाने देता है. इसलिए इसका इस्तेमाल हम रेक्टिफायर सर्किट में करते हैं. कपैसिटर को सर्किट में हम C से दर्शाते हैं और इसे फराड (F) में मापते हैं. सामान्यतः कपैसिटर कि रेटिंग माइक्रो फराड (१/१००००००० फराड) या पिको फराड (१/१००००००००० फराड) में होती है.

आम भाषा में कपैसिटर को लोग कंडेंसर कहते है. एक नजर में तो ये सामान लगते हैं लेकिन इनके बीच अंतर है. सामान्य तौर पर इसे अगर AC सर्किट में इस्तेमाल करते हैं तो कंडेंसर कहते है वहीँ DC सर्किट यानि कि इलेक्ट्रोनिक्स में इसे कपैसिटर कहते है. ये इलेक्ट्रोनिक सर्किट में एक बहुत ही महत्वपूर्ण तत्व है. आपने कभी ये जरुर महसूस किया होगा कि कभी जब आप डेक, टेप रेकॉर्डर, या कोई साउंड सिस्टम चलते हैं तो कभी कभी उसमे घरघराहट होती है या फिर उसकी आवाज बिगड़ने लगती है. इसे हमिंग कहते है. हमिंग क्यों होती है और कपैसिटर हमिंग को कैसे कम करता है इसके पहले आपको एक बार डायोड के बारे में पढना पड़ेगा जो कि पिछले पोस्ट में है.

जैसा कि हम जानते हैं कि जब डायोड AC को DC में बदलता है तो वो इसे पूरी तरह नहीं बदल पता. मतलब आउटपुट में DC के साथ साथ AC का मिश्रण भी होता है जिससे हमिंग कि परेशानी आती है. जैसा कि हम जानते हैं कि कपैसिटर AC को पास नहीं होने देता एवं DC को प्रवाहित होने देता है इसलिए हम रेक्टिफायर सर्किट में इसे लगते हैं. ऊपर चित्र में आप देख सकते हैं कि रेक्टिफायर के बाद आउटपुट में कपैसिटर लगाया गया है. जब हमें मिश्रित आउटपुट प्राप्त होता है तो सबसे पहले कपैसिटर आउटपुट से DC को स्टोर करता है फिर उसे आगे भेज देता है, मतलब पहले कपैसिटर पूरी तरह चार्ज होता है फिर डिसचार्ज होता है. लेकिन मिश्रित आउटपुट में उपस्थित AC को कपैसिटर रोक देता है और आगे जाने नहीं देता इसलिए हमें केवल शुद्ध DC आउटपुट मिलता है और हमिंग कि परेशानी दूर हो जाती है.

2 comments :

  1. अच्छी और उपयोगी जानकारी।

    (मैने इसका लिंक हिन्दी विकि में दे दिया है।)

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  2. हिंदी ब्‍लॉग जगत को उपयोगी जानकारियां प्रदान कर रहे हैं आप !!

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