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Thursday, January 14, 2010

रेक्टिफायर

जैसा कि हमने पहले देखा कि सारे इलेक्ट्रोनिक सर्किट को काम करने के लिए DC सोर्स की आवश्यकता होती है लेकिन DC वोल्टेज या करंट सामान्यतः हमारे पास उपस्थित नहीं होता. लेकिन हम सभी लोगों के पास AC सोर्स रहता है जो कि हमारे घर में आता है. तो DC वोल्टेज पाने के लिए हम AC वोल्टेज को DC में आसानी से बदल सकते है और यही प्रक्रिया रेक्टिफिकेशन कहलाती है और जो सर्किट ये कार्य करता है वो रेक्टिफायर कहलाता है. रेक्टिफिकेशन के लिए हम डायोड का इस्तेमाल करते हैं. वैसे तो डायोड के और भी कई उपयोग हैं लेकिन मुख्यतः डायोड रेक्टिफायर सर्किट बनाने के काम आता है. मतलब अगर हम डायोड के इनपुट में AC वोल्टेज देंगे तो हमें अपने आप आउटपुट में DC वोल्टेज प्राप्त होगी. कोई भी इलेक्ट्रोनिक सर्किट इसी कारण से बिना डायोड के पूर्ण नहीं हो सकती. डायोड कि सहायता से हम मुख्यतः तीन तरह के रेक्टिफायर सर्किट बना सकते हैं:
  • हाफ वेव रेक्टिफायर
  • फुल वेव रेक्टिफायर
  • ब्रिज वेव रेक्टिफायर
रेक्टिफायर की कार्य प्रणाली समझने से पहले हमेशा ये याद रखें कि डायोड केवल फॉरवर्ड बयसिंग में हीं करंट प्रवाहित कर सकता है और रिवर्स बायसिंग में करंट का प्रवाह रोकता है. इसके बारे में ज्यादा पढने के लिए पिछला डायोड ब्लॉग जरुर देखें.

हाफ वेव रेक्टिफायर: इस प्रकार के रेक्टिफायर में हम केवल एक डायोड का प्रयोग करते है. सबसे पहले हम अपने घर के २३० वोल्ट एक को एक वोल्ट स्टेप डाउन ट्रांसफार्मर के जरिये कम करते हैं. हम जितना आउटपुट DC चाहते हैं उतनी हीं क्षमता का हमें ट्रांसफार्मर लगाना पड़ता है. जैसे अगर हम १२ वोल्ट DC आउटपुट चाहते हैं तो १२ वोल्ट का स्टेप डाउन ट्रांसफार्मर लगाना होगा. अब हम जानते हैं कि AC में वोल्टेज का फेज बदलता रहता है. एक सायकल में पहला हाफ (+) और दूसरा हाफ (-). जब AC सप्लाई का (+) फेस आता है तो AC का (+) डायोड के (+) से जुड़ जाता है और डायोड फारवर्ड बायसिंग में आ जाता है इसलिए हमें एक फेस DC आउटपुट मिलता है लेकिन जब AC सप्लाई का (-) फेस आता है तो AC का (-) डायोड के (+) से जुड़ जाता है और डायोड रिवर्स बायसिंग में आ जाता है. इससे करंट का प्रवाह रुक जाता है और हमें आउटपुट नहीं मिल पता. इसे आप ऊपर के चित्र में देख सकते हैं. हाफ वेव रेक्टिफायर में आउटपुट कि शुद्धता बहुत कम होती है, लगभग ४०% DC इसलिए हम आम तौर पर हाफ वेव रेक्टिफायर इस्तेमाल नहीं करते.




फुल वेव रेक्टिफायर: इस रेक्टिफायर में हम दो डायोड का इस्तेमाल करते हैं. इसमें जब AC का (+) फेस आता है तो पहले डायोड का (+) AC के (+) से जुड़ कर फारवर्ड बायसिंग में आ जाता है और हमें पूरा आउटपुट मिलता है, फिर जब AC का (-) फेस आता है तो पहला डायोड तो रिवर्स बायस में आ जाता है लेकिन उसी समय दुसरे डायोड का (-) AC के (-) से जुड़कर फिर से फॉरवर्ड बायस में आ जाता है इस तरह फिर हमें पूरा आउटपुट प्राप्त होता है जैसा कि आप चित्र में देख सकते है. फुल वेव रेक्टिफायर लगभग हर जगह इस्तेमाल होता है क्योंकि इसकी आउटपुट क्षमता लगभग ८२% होती है जोकि काफी अच्छी मानी जाती है और साथ ही साथ ये बहुत सस्ता उपाय भी है और कोई भी इसे आसानी से बना सकता है.

ब्रिज वेव रेक्टिफायर: ब्रिज वेव रेक्टिफायर में हम चार डायोड का प्रयोग करते है. इसकी कार्य प्रणाली भी लगभग फुल वेव रेक्टिफायर के तरह ही होती है और इसका आउटपुट भी लगभग ८२% होता है. आजकल सारे सर्किटों में ब्रिज वेव रेक्टिफायर को प्राथमिकता दी जा रही है क्योंकि इसमें लोड दो कि बजाय चार डायोड पर होता है और इसका आउटपुट भी फुल वेव रेक्टिफायर के अपेक्षा ज्यादा शुद्ध होता है.

5 comments:

  1. अच्‍छी जानकारी भरा ब्‍लॉग .. बहुत बहुत धन्‍यवाद !!

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  2. बहुत ही उम्दा कार्य कर रहे है भाई आप.


    धन्यवाद.

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  3. नीलाभ भाई, आपका चिट्ठा और उसपर 'रेक्टिफायर' के बारे में जानकारी पढ़कर मजा आ गया।

    आगर आप हिन्दी विकि में भी कुछ तकनीकी विषयों पर कुछ लेखों का योगदान करें तो हिन्दी का हित सिद्ध हो।

    (उपर 'ब्रिज वेव रेक्टिफायर' के स्थान पर 'ब्रिज रेक्टिफायर' ही सही रहेगा।)

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  4. great work.. I have never seen this kind of blog.. I am your fan now..

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