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Wednesday, January 13, 2010

ट्रांसफार्मर

आपने ट्रांसफार्मर के बारे में तो जरुर सुना होगा और शायद देखा भी होगा. ट्रांसफार्मर एक इलेक्ट्रिकल कंपोनेंट है. इलेक्ट्रिकल का मतलब ये है कि ये केवल प्रत्यावर्ती धारा (Alternativ Current) पर काम करता है. आपको शायद यकीन नहीं होगा लेकिन हम ट्रांसफार्मर्स से घिरे हुए है. एक छोटे से सर्किट से लेकर घर कि बिजली तक ट्रांसफार्मर कि सहायता से उत्त्पन्न कि जाती है. कोई भी बिजली सबसे पहले बड़े बड़े प्लांट में बनती है जहाँ उसकी उत्पादन क्षमता बहुत ज्यादा होती है. ये क्षमता कई लाख वोल्ट भी हो सकती है. जैसा कि आप जानते हैं कि हमारे घर में केवल २३० वोल्ट का पावर आता है. बड़े प्लांट के लाखों वोल्ट को हमारे घर तक २३० वोल्ट बना कर पहुँचाने का काम ट्रांसफार्मर का है. ट्रांसफार्मर का काम बहुत सीधा सा है. ये AC करंट को AC करंट में हीं कन्वर्ट करता है लेकिन उसकी क्षमता घटा या बढ़ा कर. ट्रांसफार्मर के जरिये हम १००० वोल्ट AC को १० वोल्ट AC या १० वोल्ट AC को १००० वोल्ट AC में बदल सकते हैं. 


ट्रांसफार्मर कि बनावट बड़ी सरल होती है. इसमें एक धातु का कोर होता है जिसमे हम धातु की पतली तारों को लपेटते हैं. इसे हम क्वाईलिंग कहते है और उसे आप यहाँ देख सकते हैं. जैसा कि हम जानते हैं कि ट्रांसफार्मर ज्यादा वोल्टेज को कम में और कम वोल्टेज को ज्यादा में बदल सकता है. जो ट्रांसफार्मर कम वोल्टेज को ज्यादा में बदलता है उसे हम स्टेप उप ट्रांसफार्मर कहते हैं और जो ज्यादा वोल्टेज को कम वोल्टेज में बदलता है उसे हम स्टेप डाउन ट्रांसफार्मर कहते हैं. यहाँ चित्र में आप देख सकते हैं कि लेफ्ट साइड की क्वाईलिंग प्राइमरी क्वाईलिंग कहलाती है और राईट साइड की क्वाईलिंग सेकंडरी क्वाईलिंग कहलाती है. स्टेप उप ट्रांसफार्मर में प्राइमरी क्वाईलिंग कम और सेकंडरी क्वाईलिंग ज्यादा होती है उसी तरह स्टेप डाउन में प्राइमरी क्वाईलिंग ज्यादा और सेकंडरी क्वाईलिंग कम होती है. इनके इलेक्ट्रोनिक सिम्बोल भी हम आसानी से पहचान सकते है. अब आप समझ गए होंगे की हमारे घर में जो बिजली पहुँचती है वो स्टेप डाउन ट्रांसफार्मर के जरिये पहुँचती है. स्टेप उप ट्रांसफार्मर बहुत ही कम इस्तेमाल होता है क्योंकि इसकी जरुरत नहीं के बराबर होती है. जैसा की हम जानते हैं कि सारे इलेक्ट्रोनिक सर्किट DC वोल्टेज पर काम करते हैं और वोल्टेज भी काफी कम होता है और सोर्स भी हमेशा AC वोल्टेज होता है जो हमारे घर में या कहीं भी आसानी से मिलता है तो AC को DC में बदलने से पहले ये जरुरी होता है कि २३० वोल्ट AC को ५, १२, १८ वोल्ट तक कम किया जाये. ये काम ट्रांसफार्मर ही करता है.

9 comments:

  1. ये बढ़िया काम शुरु किया आपने. इस तरह की जानकारियों की कमी थी हिन्दी ब्लॉगिंग में.

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  2. Ky aap bta sktey h ki xmer DC kyon nahi hota

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    1. Naresh, Transformer keval AC current par hi kaam karta hai. Uski sanrachna aisi hi hai. Uska kaam keval voltage ko badhana ya ghatana hai na ki AC se DC ya DC se AC me convert karna. Conversion ka kaam Diode ka hota hai.

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