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Monday, October 16, 2017

अनुभव को अवसर दें

२०१३, उस समय मैं दिल्ली में रहता था। मेरा एक मित्र प्रकाश जो हिमाचल प्रदेश में रहता था, उस समय दिल्ली आया हुआ था और मेरे पास ही ठहरा था। प्रकाश से मेरी दोस्ती भी कुछ नाटकीय ही थी। उस समय मैं सोलन में कार्यरत था और किसी को वहाँ जनता भी नहीं था। बिहार से बाहर रहते हुए हिंदी भाषा, विशेषकर शुद्ध हिंदी भाषा के जानकर बहुत कम ही मिलते हैं। वहाँ का माहौल भी कुछ ऐसा ही था। एक बार मैं ऐसे ही शाम को रेलवे ट्रैक के पास टहल रहा था और अचानक मुझे एक व्यक्ति बड़ी शुद्ध हिंदी में बात करता दिखा। मैं बड़ा प्रभावित हुआ और बातों बातों में हमारी दोस्ती शुरू हुई। शायद हम दोनों ही एक दूसरे के टक्कर के थे। तो ये कहा जा सकता है कि हमारी दोस्ती की आधारशिला हिंदी ही थी। दूसरी जो सामान बात थी वो थी पुस्तकों के प्रति हमारा प्रेम। मैं पुस्तकों का शौक़ीन तो हूँ लेकिन उसे पढ़ने के बाद संभाल के रखना मेरे स्वाभाव में नहीं है जबतक वो पुस्तक कुछ अधिक ही खास हो किन्तु प्रकाश के घर का माहौल कुछ और ही था। हिंदी और पुस्तकें उसके परिवार और जीवन का एक हिस्सा थी। उससे जब परिचय बढ़ा तो पता चला कि केवल वो ही नहीं, उसके परिवार में सभी लोग हिंदी के विद्वान हैं। सोलन में गुजरे कुछ वर्ष मेरे लिए बड़े खास हैं और उसमे प्रकाश और उसके परिवार का बड़ा योगदान है। 

खैर वापस दिल्ली आते हैं। प्रकाश के आने के बाद मेरा समय बड़े मजे में गुजर रहा था। एक दिन रविवार की शाम प्रकाश ने अचानक कहा कि चलो प्रगति मैदान हो आते हैं। मैं बड़े असमंजस में पड़ गया। मेरे जैसे कंपनी के मजदूर के लिए रविवार बड़ा अमूल्य होता है और इसे इस प्रकार घूम फिर कर बिताना मेरे विचार से समझदारी नहीं थी। मैंने कहा कि इससे अच्छा घर पर ही आराम करते हैं किन्तु प्रकाश कहाँ मैंने वाला था। उसे मना नहीं कर सकता था इसी कारण उसके साथ हो लिया। रास्ते में पता चला कि हम विश्व पुस्तक मेले में जा रहे हैं। मैं प्रसन्न हो गया। उसका एक कारण ये भी था कि पिछले साल मेरी एक पुस्तक प्रकाशित हुई थी और मुझे नहीं, किन्तु प्रकाश के ये याद था कि शायद वो पुस्तक हमें पुस्तक मेले में मिल जाये। खैर हम प्रगति मैदान में पहुँचे और वहाँ का माहौल देख कर मुझे बड़ा संतोष हुआ।

एक हिंदी और पुस्तक प्रेमी होने के कारण मुझे हमेशा ये शिकायत रही है कि हिंदी और पुस्तकों का चलन अब कम होता जा रहा है लेकिन वहाँ हजारों की संख्या में पुस्तक प्रेमियों को देख कर मन प्रसन्न हो गया। हाँ ये अलग बात थी की उनमे से अधिकतर अंग्रेजी पुस्तकों के लिए वहाँ आये थे। हमलोग सबसे पहले डायमंड बुक्स के स्टाल में पहुँचे जिन्होंने मेरी पुस्तक "स्वयंवर" को प्रकाशित किया था और मेरी ख़ुशी का कोई ठिकाना नहीं रहा जब मैंने अपनी पुस्तक को वहाँ प्रदर्शनी में लगे देखा। उस अहसास को शब्दों में बताना बड़ा कठिन है। हमने कुछ तस्वीरें ली और फिर कुछ और दुकानों से होते हुए वापस जाने के लिए मुड़े ही थे कि मेरी नजर एक व्यक्ति पर पड़ी। व्यक्ति जाना पहचाना थे और इससे पहले मैंने उन्हें सिर्फ तस्वीरों और टीवी पर देखा था। वो अशोक चक्रधर थे। काफी भीड़ लगी हुई थी। हम फटाफट वहाँ पहुँचे और अशोक जी को नमस्कार किया। उन्होंने हमारे नमस्कार का जवाब दिया और जल्दी से हमें बैठने को कहा। वहाँ कोई सभा होने वाली थी और अशोक जी भी उसी कारण वहाँ पहुँचे थे। हम चुप चाप बैठ गए। कुछ समय के पश्चात मैंने उस व्यक्ति को देखा जिसका मैं बहुत बड़ा प्रशंसक हूँ और जिनको देखने की इच्छा बचपन से थी। वही उस सभा के मुख्य अतिथि थे और जब घोषणा हुई कि वे मंच पर आने वाले हैं, मुझे यकायक विश्वास ही नहीं हुआ। वो हिंदी भाषा के सबसे सम्मानित साहित्यकारों में से एक, नरेंद्र कोहली थे। बचपन में मुझे एक बार उनका एक उपन्यास "अवसर" पढ़ने का अवसर मिला और मैं उनकी लेखनी का कायल हो गया। और आज उन्ही को अपने सामने देख बड़ी प्रसन्नता हो रही थी।

करीब आधे घंटे तक वो कार्यक्रम चला और उसके बाद दर्शकों से प्रश्न पूछने को कहा गया। सबसे पहला प्रश्न अशोक चक्रधर जी ने ही पूछा। उनके अनुसार वे नरेंद्र कोहली के बहुत बड़े प्रशंसक थे और उनके दैनिक दिनचर्या के बारे में जानना चाहते थे। स्वयं इतने बड़े साहित्यकार के द्वारा इस प्रकार प्रश्न पूछने पर नरेंद्र कोहली ने बड़ी आत्मीयता से उसका उत्तर दिया और उनके वार्तालाप में एक गुरु और शिष्य जैसा भाव छुपा हुआ था। मैं इस मौके को हाथ से जाने नहीं देना चाहता था और मैंने भी उनसे एक प्रश्न किया। मुझे वास्तव में याद नहीं कि उन्होंने क्या उत्तर दिया क्यूंकि मैं तो प्रश्न पूछने का मौका पाकर ही अभिभूत था। 

जब सभा समाप्त हुई तो मैं और प्रकाश मंच पर गए और अपनी लिखी पुस्तक उन्हें भेंट की। मुझे समझ में नहीं आ रहा था कि कहा क्या जाये इसलिए मैंने हड़बड़ी में कह दिया कि "मैंने एक बुक लिखी है और चाहता हूँ आप उसे पढ़ें।" नरेंद्र जी ने मुस्कुराते हुए उत्तर दिया "अगर बुक है तो अपने पास ही रखिये। हाँ अगर कोई पुस्तक लिखी है मैं पढ़ना चाहूंगा।" मैंने झेंपते हुए उन्हें "स्वयंवर" भेंट की और भला हो प्रकाश का जिसने उस पल को कैमरे में कैद कर लिया। यही नहीं, जब हम वापस जा रहे थे तो फिर से अशोक चक्रधर जी से भेंट हो गयी और उन्हें भी मैंने अपनी पुस्तक भेंट की। 

कुछ मिनटों बाद जब हम मेट्रो से वापस अपने घर की ओर जा रहे थे तो मैं सोच रहा था कि वाकई कभी कभी कुछ ऐसा अप्रत्याशित हो जाता है जो कभी सोचा नहीं होता। आज अगर प्रकाश जिद ना करता तो शायद मैं अपने घर पर बैठा टीवी ही देखता रहता। ये जो अनुभव आज मैं लेकर जा रहा हूँ उसके बारे में शायद मुझे कभी पता भी नहीं चलता। तो जीवन ऐसा ही है। अनुभव होते रहते हैं। कुछ अच्छे, कुछ बुरे पर सबसे बड़ी बात ये है कि क्या हम अच्छे बुरे की फ़िक्र छोड़ कर उस तथाकथित अनुभव को एक अवसर देते हैं? देकर देखिये। क्या पता वो आपके जीवन का सबसे कीमती अनुभव बन जाये।

Thursday, September 21, 2017

Error: The Network Time Protocol service started and then stopped

The Network Time Protocol service is responsible for time sync in all the domain controllers. Among all DCs, the PDC FSMO role holder plays a role of central time server. Have you ever gone through following error:

"The Network Time Protocol service on ServerName started and then stopped. Some services stop automatically if they are not in use by other services or programs."









No matter how many times you will start that service, it will automatically stop immediately. 

If you go and see the NTP server log in "C:\Program Files\NTP\ETC\ntp.log" file, you will see multiple errors like:

21 Sep 00:36:01 ntpd[6184]: unable to bind to wildcard address :: - another process may be running - EXITING
21 Sep 00:36:01 ntpd[6184]: ntservice: The Network Time Protocol Service is stopping.










The error comes because there are multiple instances of a service is running on same port. All network protocol related services use port No: 123 and in Windows server, both "Network Time Protocol" service and "Windows Time" service run on same port 123 by default. You can customize different ports for both services later.

So here comes the solution. Just stop "Windows Time" service in the server and then start "Network Time Protocol" service. It will start properly. Once you have started "Network Time Protocol (NTP)" service, you can again start "Windows Time (W32Time)" service successfully.

Cheers!

Monday, August 28, 2017

फेसबुक का स्तर दिन ब दिन गिरता जा रहा है

दोस्तों, आज मैंने फेसबुक पे कुछ ऐसा झेला है जैसा पहले कभी नहीं देखा। कोई भी बात बताने से पहले मैं ये बताना चाहता हूँ कि मेरा ये पोस्ट केवल मेरे मित्र ही देख सकते हैं। तो अगर आप ये पोस्ट पढ़ सकते हैं तो आप पहले से मेरे फ्रेंड लिस्ट में हैं।

आज एक व्यक्ति जिसका नाम "दिव्यांशु सेठी" है और जो कुल्लू का रहने वाला है उसने कुछ आपत्ति जनक फोटो (फोटोशॉप के जरिए) मेरे चेहरे को लेकर बनायीं और उसे एक पोस्ट जिसपर मैंने कमेंट किया था वहाँ पोस्ट कर दी। मैंने तुरंत उसे फेसबुक को रिपोर्ट किया और उसे मेस्सेंजर के जरिये मेरा फोटो हटाने के लिए कहा। फोटो हटाने के बजाय वो मेसेंजर पर ही और फालतू की फोटो भेजने लग गया जिस वजह से हममे लंबी बहस हुई और मैंने उसका अकाउंट ब्लॉक कर दिया।

उसके एक मिनट के बाद ही किसी अजीब सी प्रोफाइल से वही तस्वीरें मेरे एक पोस्ट के कमेंट के रूप में पोस्ट की गयी। मैंने उसे तुरंत हटाया और उस अकाउंट को ब्लॉक किया। उसे तुरंत बाद किसी और अजीब से अकाउंट से वही तस्वीरें अपलोड की गयी और एक एक कर के मैंने ५ अकाउंट को ब्लॉक किया।

इसके कुछ मिनटों बाद वही तस्वीरें मेरे खुद के अकाउंट से मेरे ही पोस्ट पे कमेंट की गयी। मुझे लगा मेरा अकाउंट हैक हो गया है और मैंने तुरंत अपना पासवर्ड बदला लेकिन वैसी तस्वीरें पोस्ट होती रही। मेरे दोस्त तपस्विनी और राहुल इस बात के गवाह हैं। बाद में मुझे पता चला की उस व्यक्ति ने मेरे प्रोफाइल पिक्चर को लेकर ठीक मेरे नाम की फेक प्रोफाइल बनायीं है और उसी से वो उन तस्वीरों को पोस्ट कर रहा है। उसने एक के बाद एक ६ अकाउंट मेरे नाम की बनायीं और मैं सबको ब्लॉक करता रहा। मजे की बात ये है कि वो ये सिर्फ इसलिए कर रहा था क्योकि वो रणवीर सिंह का बहुत बड़ा प्रशंसक था और मैंने उसके खिलाफ एक पोस्ट पर कमेंट किया था। मुझे नहीं पता था कि वो इतना नीच और मानसिक रूप से विक्षिप्त व्यक्ति है।

मैंने तुरंत इसकी शिकायत कुल्लू पुलिस के फेसबुक पेज पर किया और भाग्य से उनकी तरफ से तुरंत उत्तर आया। उनके द्वारा चेतावनी देने के बाद वो व्यक्ति मेरे पोस्ट पे कमेंट करना बंद किया। हालाँकि वो अभी भी मेरे मेस्सेंजर पर वही तस्वीरें भेज रहा है जिसे मैंने ब्लॉक कर दिया। यही नहीं वो व्यक्ति पूरे फेसबुक पर वर्मा नाम के सभी व्यक्तियों का नाम खोज खोज कर उन्हें वो तस्वीरें भेज रहा है। मैं कुल्लू पुलिस की सहायता के लिए उनका आभारी हूँ।

मेरी ये प्रार्थना है कि अगर आपको मेरे नाम से कोई फ्रेंड रिक्वेस्ट आये तो उसे स्वीकार ना करें क्युकी आप पहले से ही मेरे फ्रेंड लिस्ट में हैं क्युकि इससे वो और आगे जा सकता है और आपकी गोपनीयता के साथ भी छेड़ छाड़ कर सकता है।

अंत में मैं सबसे, खासकर महिलाओं से अनुरोध करता हूँ कि वो फेसबुक में अपनी प्राइवेसी सेटिंग के पूरी तरह से सेट करें ताकि आपकी गोपनीय चीजों का गलत प्रयोग ना हो सके। साथ ही फ्रेंड रिक्वेस्ट को अप्रूव करते समय भी ये सुनिश्चित करें कि आप उसे जानते हैं या नहीं। फेसबुक दिन ब दिन घटिया लोगों से भरता जा रहा है और आश्चर्यजनक रूप से ऐसा कोई तरीका नहीं है जिससे इस तरह की हरकतों को रोका जा सके। फेसबुक और व्हाट्सप्प जैसे बड़े प्लेटफार्म में इस तरह की चूक होना आश्चर्यजनक है।

तो फिर से, अपनी प्राइवेसी सेटिंग्स को ठीक करें और हो सके तो इस पोस्ट को अधिक से अधिक शेयर करें ताकि ज्यादा से ज्यादा लोग इस तरह के अपराध से बच सकें। धन्यवाद।

Facebook is becoming worse day by day

Friends, today I have faced something which was really weird and disturbing. Before I proceed, let me tell you that my this post can only be seen by my friend. So if you can read this, you already in my friend list.

So here is the incident. A guy name "Divyanshu Sethi" from Kullu has posted some abusive pics (photoshopped) using my profile picture. I immediately reported that pic and asked him to remove it from facebook. Instead of removing it from facebook, he started sending those abusive pics on my messanger. I was too furious and we have a hard talk and finally I blocked him completely.

Within few mins, I got same pics from some other fake profile on my post's comment. I immediately deleted it and blocked that profile too. Within a min, same thing happened from another fake account and back to back I have blocked 5 profiles.

After few mins, I see that same pics are being posted on my post as comment with my own account. I was shocked and thought my account has been hacked. I immediately changed my password but the comment was keep coming. Tapashwani and Rahul have witness that. I got to know that he created another account of my name using my pic which was looking identical. I immediately blocked him but again he did the same again and again. To be specific, he created 6 accounts of my name, with my pic and no one else can differentiate. Interestingly, all he was doing because he was Ranvir Singh's hardcore fan I commented something against him. He is such a cheap and mental person I did not know.

I asked help from Kullu Police and I was lucky that I got immediate response from them and after their warning, he stopped doing this. However he is not posting anything on post now but keep sending same images on my Messenger, which I have blocked. This is not all, he is now searching random person having surname "Verma" and sending those pics to them. I am very thankful of Kullu Police for their kind support.

Now my request is, in case you get an invitation from me, which is not required as you are already my friend, please DO NOT accept it as he can go further and do something wrong with you too.

At last, I want to tell you, specially girls that please do your privacy settings properly because of you don't do it, you will give full access to cheap people like him who can misuse it. Also approving friend request, please be very very careful.

Facebook is becoming worse place day by day and surprisingly, there are many loopholes in facebook which can sacrifice your privacy but facebook has no mechanism at all to stop these kind of crime. Neither there are direct support by which we can reach facebook support for such an issue. This is really unfortunate for a huge platform like facebook and WhatsApp.

So I again suggest all of you, take some time and secure your facebook profile as soon as possible. Please do share if possible so that more and more people can be aware of this kind of crime. Thanks a lot.

Thursday, August 24, 2017

How to assign, list and remove SPN

SPN or Service Principal Name is a unique (in the whole forest) identity for a service, mapped with a specific account (mostly service account). I hope you are aware of CNAME records in DNS. SPN is more or less same as CNAME. Which means, using SPN, we can create multiple alias for a service mapped with a domain account. So how it's useful? Well, with the help of SPN, services running in different servers in a domain can communicate to each other. For example, one account is being used to login to a server running SQL service and a server running IIS service. With the help of SPN, we can use a common way so that the account can be mapped in all the servers it's using. Every object we create in Active Directory has an attribute called "servicePrincipalName" where all the SPNs are getting registered for that object.

There are mainly 4 parts in SPN:
  1. Service Name: Name of the service instance running on the server. Let's assume the service we are using for SQL server and service instance name is "MSSQLSvc".
  2. Hostname: Server name on which service is running. Let's assume the server's hostname is "DBSrever" which is member of "MyDomain.com" domain.
  3. Port: Port no, service is running on. Let's assume the SQL service is running on port no "5000". This is optional. If the service is running on a default port, you can leave it. For example if you are setting SPN for HTTP service which is already running on default port no 80, you don't need to mention the port no while executing the command.
  4. Account: Service account you want to map the service with. Let's assume the account name is "DBUser@MyDomain.com" or "MyDomain\DBUser"
To assign, list or delete the SPN, we use an in-built command line tool "SETSPN" provided by Microsoft. Use this tool as below:

To set the SPN, login to the server and run following command:

setspn -a MSSQLSvc/DBServer.MyDomain.com:5000 Mydomain\DBUser and
setspn -a MSSQLSvc/DBServer:5000 MyDomain\DBUser (to add SPN for only hostname)

Note: You can also use "-s" switch instead of "-a" to check the existing SPN (if any) before assigning the SPN.

To list the SPN for that account, run following command:

setspn -l MyDomain\DBUser or
setspn -l DBUser

To delete the SPN, run following command:

setspn -d MSSQLSvc/DBServer.MyDomain.com:5000 MyDomain\DBUser and
setspn -d MSSQLSvc/DBServer:5000 MyDomain\DBUser

Wednesday, March 29, 2017

सर्विस टैक्स छूट की जमीनी हकीकत

कुछ दिनों से ये चर्चा बड़ी गर्म थी कि अब खाने के बाद सर्विस टैक्स देना अनिवार्य नहीं है। अगर आपकी इच्छा हो तो दें या ना दें। ये किसी भी आम आदमी के लिए बहुत बड़ी खबर थी।

साधारण सी बात है कि अगर आप अपने परिवार के साथ कही खाने जाते हैं और 1000 रूपये का बिल बनता है तो 15% सर्विस टैक्स के साथ 150 रूपये अतिरिक्त देने होते है। यही नहीं उस सर्विस टैक्स पर आपको 6% वैट भी देना होता है। यानि 9 रूपये। तो 1000 के कुल खर्च पर आपको 159 रूपये की अच्छी खासी रकम देनी पड़ती है। पता नहीं आपने ध्यान दिया है या नहीं पर कई रेस्टॉरेंट पूरे बिल पर वैट और सर्विस टैक्स अलग अलग काटते हैं। यानी 1000 रूपये पर 210 रूपये अतिरिक्त।

आजकल लोगों की आमदनी काफी तेजी से बढ़ी है और शायद इसी कारण हम सीधे टोटल को देखते हैं। मेरे जैसे कई व्यक्ति जिन्हें इससे चिढ भी होती है तो भी केवल इसी लिए चुप रह जाते है कि इतनी छोटी रकम के लिए कौन चिक चिक करे? यकीन मानिए यही छोटी छोटी चीजें एक दिन आपको सड़क पर ला सकती है। खैर टैक्स का विश्लेषण हम कभी और भी कर सकते हैं।

आज इस पोस्ट को लिखने का कारण कुछ और है। पिछले कई दिनों से मैने कई बार सोचा कि सर्विस टैक्स देने से मना करू और फिर देखूं कि उनकी ओर से क्या जवाब आता है लेकिन कर नहीं पाया। एक दिन निश्चय करके मैंने बैंगलोर के एक होटल में सर्विस टैक्स देने से मना कर दिया तो उन्हें जैसे फर्क ही नहीं पड़ा। बहस से बचने के लिए मैंने पूरा भुगतान किया। बैंगलोर से वैसे भी मेरा 36 का आंकड़ा है इसलिए मैंने ज्यादा सर नहीं फोड़ा लेकिन उसके बाद हैदराबाद, कोलकाता और अब भागलपुर में भी जब मैंने सर्विस टैक्स देने से मन किया तो सब ने किसी ना किसी रूप में मना कर दिया। भागलपुर में तो जवाब सबसे हास्यप्रद था। उनके हिसाब से सर्विस टैक्स को वैकल्पिक बनाने का निर्णय अभी तक भागलपुर पर लागू नहीं हुआ है। खैर...

अब सवाल ये है कि क्या वाकई ये नियम भारत सरकार की ओर से बनाये गए है? अगर हाँ तो क्या आपमें से कोई इसको सत्यापित कर सकता है? अगर ये नियम वाकई में हैं तो फिर भारत सरकार इसे किस प्रकार से मॉनिटर कर रही है? सबसे अहम् सवाल कि अगर कोई होटल इस नियम को मानने से इंकार कर देता है तो हमारे पास क्या विकल्प है? क्या उसकी शिकायत कही की जा सकती है?

इस सबसे पहले, टैक्स लेने का हिसाब किताब आखिर क्या है? जब हम खाना खरीदते है तो वो कोई डब्बाबंद तो होता नहीं जिसपर वैट (सेल्स टैक्स) लगाया जा सके। दूसरी बात अगर आप वैट लगा रहे हैं तो फिर आपको अपने सामान को बोचने के लिए सर्विस तो देनी ही होगी। फिर उसपर सर्विस टैक्स लगाने का क्या तुक है? अगर हम खाना केवल पार्सल करवा रहे हैं उस स्थिति में भी आप सर्विस तो कुछ दे नहीं रहे है फिर सर्विस टैक्स का भुगतान ग्राहक क्यों करे? और सबसे अजीब बात कि ये वैट और सर्विस टैक्स एक साथ लगाना कहाँ का पागलपन है?

क्या आपने से कोई और भी इस तरह की मनमानी का शिकार हुआ है? अगर हाँ, तो कृपया अपना अनुभव साझा कीजिये। पता तो चले कि आखिर ये हो क्या रहा है?

Tuesday, February 21, 2017

बैंगलोर का वाकई कोई जवाब नहीं

आज मेरे साथ कुछ ऐसा घटा जिससे मेरी दृष्टि में बैंगलोर की महानता में एक और उपलब्धि जुड़ गयी। मैं आज किसी काम से विप्रो के इलेक्ट्रॉनिक सिटी ऑफिस में गया था जो मेरे घर से काफी दूर है। वापसी में एक छोटे सी दुर्घटना के कारण मेरे पैरों में थोड़ी चोट लग गयी। मैं काफी दूर से पैदल आ रहा था लेकिन चोट लगने के कारण आगे चलने में थोड़ी तकलीफ हुई। उस वक्त मैं विप्रो के गेट नंबर ११ पर था जहाँ से विप्रो बस स्टैंड महज ५०० मीटर की दूरी पर है। पहले मैंने एक ऑटो वाले से पूछा और जैसी कि मुझे उम्मीद थी, उसने आधे किलोमीटर चलने के लिए २०० रूपये माँगे। शायद उसे भी मेरी मजबूरी का पता चल चुका था। मुझे समझ में नहीं आया कि मैं उसे क्या कहूँ? बहुत क्रोध आया लेकिन मैंने उससे कुछ कहा नहीं। जाते जाते वो कुछ मोल भाव करने लगा लेकिन उस समय तक मुझे उसके ऑटो में मुफ्त में भी जाने की इच्छा नहीं थी।

जैसे ही मैं आगे बढ़ा, एक व्यक्ति बाइक पर आया और मेरे पास रुक गया। वो Concentric Technology में काम करता था। मैंने उससे अनुरोध किया कि क्या वो मुझे अगले मोड़ तक छोड़ सकता है? उसने मुझे बिठा लिया और दो मिनट बाद मैं विप्रो बस स्टॉप पर था। मैंने उसका शुक्रिया अदा किया और जाने लगा कि अचानक उसने मुझसे ५० रूपये माँगे। एक पल को तो मुझे समझ ही नहीं आया कि हुआ क्या है? तुरंत ही मुझे समझ में आ गया कि वो मुझसे लिफ्ट देने की फीस मांग रहा है। मैं इसके लिए बिलकुल तैयार नहीं था। मुझे जरा भी अपेक्षा नहीं थी कि एक पढ़ा लिखा व्यक्ति जो इतनी बड़ी कंपनी में काम करता है मुझसे लिफ्ट देने के पैसे मांगेगा। मेरे मुँह से सिर्फ इतना निकल "५० रूपये?" और उसने बड़ी शालीनता से जवाब दिया "हाँ बैंगलोर में यही रेट लगता है।"

मैं अवाक् था लेकिन बात बढ़ाना नहीं चाहता था। मैंने उसे १०० रूपये का नोट दिया और उसने इस प्रकार मुँह बनाया जैसे आजकल दुकानदार २००० का नोट देख कर बनाते हैं। वो लगभग सड़क के बीच में खड़ा था जिससे पीछे के वाहनों ने हॉर्न बजाना शुरू कर दिया। उसने जल्दी से जेब से १०-१० के तुड़े मुड़े नोट निकले और मेरे हाँथों में थमा दिया। इससे पहले कि मैं उसे गिनता, वो व्यक्ति तेजी से वहां से चलता बना। मैंने बाद में देखा, उसमे केवल ३० रूपये थे।

मुझे उस समय कितना गुस्सा आया मैं यहाँ बता नहीं सकता। उस समय वो तीस रूपये पकडे मुझे बहुत ही ज्यादा शर्म आ रही थी। गुस्से में मैंने वो तीस का नोट वही सड़क पर फेंका और वापस अपने घर की ओर चल दिया। पूरे रास्ते मैं केवल यही सोच रहा था कि आखिर आज ये हुआ क्या? यकीन मानिये इस पोस्ट को लिखते हुए भी मैं गुस्से से कांप रहा हूँ। 

मैंने सालों साल निकल दिए। इस देश के २७ राज्यों में रह और घूम चुका हूँ। सैकड़ों लोगों से लिफ्ट ली है लेकिन ऐसा पहले कभी नहीं हुआ। इतनी जगहों पर रहने के बाद भी लगता है जैसे बैंगलोर कोई अलग देश ही है। कुछ दिन पहले मैंने एक पोस्ट शेयर किया था जिसमे मैंने बताया था कि कोलकता में मैंने राज्य सरकार की AC बस से सफर किया था जिसमे १९ किलोमीटर के लिए मुझे केवल ४५/- रूपये ही लगे थे और उसी १८ किलोमीटर के सफर के लिए मुझे बैंगलोर राज्य सरकार की AC बस में २६०/- रूपये लगे थे। इतना अंतर? आखिर किस लिए? क्या यहाँ की बसों में सोने चांदी की कुर्सियां है? ऐसी क्या खासियत है कि यहाँ पर जनता से दूसरे राज्यों की अपेक्षा ६-७ गुणा तक किराया वसूला जा रहा है? अगर आप घर लेने जायेंगे तो आपसे इतना पैसा मुँह खोल कर माँगते हैं जैसे पूरे देश में केवल उन्ही का घर किराये पर उपलब्ध है। उसके ऊपर १० महीने से लेकर १ साल तक का किराया सिक्योरिटी के रूप में भी चाहिए उन्हें। क्यों भाई? हम सभी इतनी मेहनत इसी कारण कर रहे हैं क्या कि आपकी जेबें भरते फिरें? इन सब के ऊपर से आज की घटना ने तो इस शहर के प्रति मेरी घृणा और बढ़ा दी है। लोग कहते हैं कि बैंगलोर इतना खूबसूरत शहर है। घंटा खूबसूरत है। उस खूबसूरती का हम लोग जैसे आम लोग अचार डालेंगे क्या? आखिर इतनी बेमतलब की महँगाई क्यों? जितनी जल्दी हो सके मैं इस नर्क से निकलना चाहता हूँ। अगर पेट का सवाल नहीं होता तो कब का ये शहर छोड़ चुका होता। यहाँ इमारतें महँगी हैं और इंसान सस्ते। 

बैंगलोर शहर की खूबसूरती देखने अवश्य आइये लेकिन साथ ही ये भी देखने की कोशिश कीजिये कि इस शहर में पैसे का कैसा बोलबाला है। पैसे के लिए इतना नीचे गिरने वाला शहर आपको पूरे भारत में ढूंढने में बड़ी मुश्किल होगी।

अंत में सिर्फ इतना कहना चाहूंगा कि बैंगलोर के निवासियों को शायद मेरी इन बातों से कष्ट पहुँच सकता है। लेकिन ईश्वर के लिए मेरी इस भावना को किसी व्यक्ति अथवा समुदाय से जोड़ने का प्रयास ना करें। जो भी उदगार निकला है वो पूर्ण रूप से मेरा अपना है।  

Tuesday, January 10, 2017

LOT 980 Dumps (IBM Certified Associate Administrator - Lotus Notes/Domino 8.5)

  1. While you used the Domino Administrator client, what two subtabs may be found under the Messaging tab?
    1. Mail and tracking center
    2. Router and mailboxes
    3. Mail users and SMTP configuration
    4. Mail statistics and mail analysis
  2. Joes is creating a new password for himself. Which one of the following will "password quality checking" indicate is the least secure password?
    1. All uppercase passwords
    2. Mixed case passphrases
    3. Words found in Notes dictionaries during spell check
    4. Passphrases containing numbers and punctuation
  3. In addition to Notes databases, which of the following file on a Domino server should be backed up in order to ensure that new users can be created in case of loss of the server?
    1. The user's desktop.dsk file
    2. The server's bookmark.nsf file
    3. Cache.dsk
    4. Certified ID files
  4. Ben attempts to send Jerry a Notes mail message. Both users are on the same mail server. Which of the following paths will the message take?
    1. The SMTP task will receive the message from Ben and immediately send it to Jerry aster following the SMTP to Notes path defined in the configuration settings documents for the mail server
    2. The Router will receive the message from Ben and deliver it immediately to Jerry's mailfile via NRPC
    3. The server will receive the message from Ben and send it to the mail hub for distribution back to the mail server and then deliver to Jerry's mailfile
    4. The Router will receive the message from Ben and deliver it immediately to Jerry's mailfile via SMTP
  5. You have the ability to set different levels of administration access to users. Which of the following represents the hierarchy order for privileges from greatest to least access?
    1. Full Console administrator > System Administrator > Full Access administrator > Administrator
    2. Server administrator > View Console administrator > Administrator > User administrator
    3. Full server access administrator > Console rights administrator > User administrator > View access only administrator
    4. Full access administrator > Administrator > Full console administrator > System administrator
  6. Tom set up a Domino domain and organization. Which one of the following describes the difference between a Domino domain and a Domino organization?
    1. A Domains define security and naming conventions. Organizations are comprised of users and servers that share a common Domino Directory.
    2. Domains are comprised of users and servers that share a common Domino Directory. Organizations define security and naming conventions.
    3. Domains refer to a company's hierarchical structure. Organizations refer to users who share a common organizational certifier.
    4. There is no difference. Domains and organizations function in the same manner.
  7. Why did Tom designate Server1/Boise/Acme as the Administration Server for the Domino Directory?
    1. To make sure that all new users were registered on Server1/Boise/Acme.
    2. To prevent users from making changes to the Domino Directory on Server1/Boise/Acme.
    3. To force administrators to make all changes to the Domino Directory on Server1/Boise/Acme.
    4. To ensure that the Administration Process would process all Domino Directory changes on Server1/Boise/Acme.
  8. The server Web1/XYZ defaults to Server document settings to obtain configuration information for Internet protocols when which of the following features is not enabled?
    1. Global Domain documents
    2. Single Sign-on documents
    3. Internet Site documents
    4. Web Configuration documents
  9. In what order would Richard build a naming convention for his organization where user names would have the following format: Chris Maxwell/Amsterdam/Acme & AJ Mathis/Sydney/Acme
    1. Create two Organizational (O) Certifiers named Acme and use one to create an Organizational Unit (OU) Certifier named Amsterdam and the other O Certifier to create an OU Certifier named Sydney
    2. Create a common Name (CN) Certifier named Acme and then create Organizational (O) Certifiers named Amsterdam and Sydney
    3. Create an Organizational (O) Certifier named Acme and then create Organizational Unit (OU) certifiers named Amsterdam and Sydney
    4. Create a Organizational (O) Certifier named Amsterdam, an Organizational (O) Certifier named Sydney and an Organizational Unit (OU) certifier named Acme
  10. Susan has created a list of IP Addresses for the web server that are allowed access and a list of IP Addresses that are denied access. Both are placed in the appropriate fields. Which field take precedence BY DEFAULT when the same IP address is found in both lists?
    1. The Deny Access field
    2. An error will be presented stating an address may not be in both fields
    3. The substitution Access field
    4. The Allow Access field
  11. OCSP on the Domino server is enabled through which of the following?
    1. A Server configuration document
    2. Security policy
    3. Certificate authority database
    4. Server document
  12. John is setting up a single domain with a single organization. As a result, all Domino server IDs must be created using which one of the following?
    1. The same organizational (O) certificate or a child of the organizational (O) certificate
    2. The same cross-certificate
    3. The same administrator certificate
    4. The same country (C) certificate or a child of the country (C) certificate
  13. You are building Domino Domain Monitoring probes in Domino 8.5 and wish to create a standard Possible Solution for all of them. Which of the following document types allow this capability?
    1. Corrective
    2. Embedded
    3. Component
    4. Modular
  14. Which one of the following group types is used to prevent access to Domino servers?
    1. Servers only
    2. Deny list only
    3. Mail only
    4. Access Control List only
  15. Where does the Domino Server Setup program store the certifier ID file by default?
    1. In any network drive location that you specify during installation
    2. In the directory you specify as the Domino data directory during installation
    3. On the Domino Administrator's local machine in My Documents\Lotus\Certifiers directory
    4. In the Domino Name and Address Book
  16. John registered a new server. In which one of the following was the Server document placed?
    1. DIRECTORY.NSF
    2. CATALOG.NSF
    3. CERTLOG.NSF
    4. NAMES.NSF
  17. Terry is working on a document in a database on a server that is DAOS enabled. While in the document, Terry replaces the attachment with a new version. Which of the following occurs to the attachment in the DAOS store?
    1. The server removes the previous attachment entirely from DAOS and inserts the link to the new attachment
    2. The server adjusts references to the attachment in DAOS
    3. The server sends the full previous attachment to all user mail file that pointed to that original file reference
    4. The server removes the reference from all mail files that pointed to that original file reference
  18. Jon registered a new user. Which one of the following authentication elements is NOT found in that user's ID file?
    1. Private key
    2. HTTP password
    3. Certificates
    4. Public key
  19. Your Organizational certifier is named Acme. Each city in your company has an Organizational Unit certifier from the Acme certifier that references the city. Susan wants to create an Organizational Unit certifier below the city organizational Unit certifier. Which one of the following must she have to accomplish this?
    1. A copy of the city's Organizational Unit certifier
    2. A copy of the Acme Organizational certifier
    3. Copies of both the Acme Organizational certifier and the location's Organizational Unit certifier
    4. Reader access to the domain's directory
  20. In which of the following databases may you view all the database ACLs on a server by user name, access level, or by database?
    1. Log
    2. Certlog
    3. Names
    4. Catalog

Thursday, December 15, 2016

How to enable webpage to change Domain User's password in Windows 2012 Server

In a large environment, we can't give every Administrators, access to Active Directory servers to reset the password. I am going to tell you how we can enable a Webpage to achieve the same goal. You don't need to install any third party software for that. Everything will be done by core Microsoft services.
  • Open "Server Manager" and click on "Remote Desktop Services" and then "Next".
 
  • In "Role Services" screen, click on following roles to install. It will ask to add few additional features. Click on "Add Features" to add them.
    • Remote Desktop Connection Broker
    • Remote Desktop Session Host
    • Remote Desktop Web Access

  • In "Web Server Role (IIS)" screen, keep all default settings selected.

  • In confirmation screen, click on "Install" to install the role. Once it's done, click on "Finish" and then reboot your server.

  • After reboot, open "Internet Information Services (IIS) Manager" and navigate to "Server Name -> Sites -> Default Web Site -> RDWeb -> Pages". At right side, you will find "Application Settings" icon. If' the screen is in "Content View", you will not see all these options. In that case you can right click on "Pages" and set it to "Features View".

  • Double click on "Application Settings" and there you will find "PasswordChangeEnabled" option. Double click on "PasswordChangeEnabled" and set it to "true" and click "OK".

  • Once it's done, open your Internet Explorer and access this URL: https://FullServerName/RDWeb/Pages/en-US/password.aspx. Where Server Name will be your FQDN of your server (e,g. server1.abc.com) or you can use the IP Address of your server. It will give a security warning for SSL, please accept it and the it will land you to the Password Change webpage.

  • You can provide this link to your Administrators to change the password without disturbing the main Active Directory server.

Thursday, October 27, 2016

"Jio" - बाप रे बाप!

जब से रिलायंस ग्रुप ने "जिओ" को लांच करने की बात की थी, पूरे टेलीकॉम जगत में जैसे हलचल सी मच गयी थी। ऑफर भी जबरदस्त था। कुछ भी करो सब मुफ्त। और हम सभी जानते हैं कि मुफ्त की चीजों की भारत में कितनी इज्जत और जरुरत है। मैं भी हैरान था कि आखिर कोई कंपनी इतनी कीमत पर डाटा और मुफ्त में कॉल क्यों उपलब्ध करवा रही है? वैसे ख़ुशी भी थी क्योंकि इससे बाँकी कंपनियों की मनमानी बंद हो जानी थी जो लगातार डाटा की कीमतें बढ़ा रहे हैं। तो आज मैं जियो के बारे में अपना अनुभव बाँटना चाहता हूँ। 

उससे पहले २००९ में चलते हैं। मैं नया नया दिल्ली में आया था और एक मोबाइल नंबर लेना चाहता था (उस समय मोबाइल पोर्टेबिलिटी का विकल्प नहीं था)। मेरे एक परिचित ने कहा कि नया नंबर लेने की क्या जरुरत है? तुम मेरा रिलायंस का सिम इस्तेमाल कर लो। सबसे सस्ता है। मैंने देखा कि रेट्स तो वाकई जबरदस्त हैं। कोई और मोबाइल कंपनी उनके प्लान्स के आस-पास भी नहीं थी। मैं बड़ा खुश था। फटाफट जाकर २०० रूपये का रिचार्ज करवा आया। फिर मैंने सोचा कि सब को फ़ोन करके अपना नंबर दे दूं। घर फ़ोन मिलाया तो नेटवर्क बिजी आया। फिर किया, फिर बिजी। करता रहा, करता रहा और कुछ २५-३० प्रयासों के बाद फ़ोन मिला। मैंने सोचा शायद आज समस्या है किन्तु पता चला कि रिलायंस के साथ ये हमेशा की समस्या है। कई बार इतना चिढा कि फ़ोन पटकते पटकते खुद को रोकना पड़ा। मैंने २०० रुपयों में केवल ५-६ रूपये खर्च किये फिर रिलायन्स को छोड़ने का फैसला किया। ये स्थिति थी कि मैं अपने अकाउंट में पड़े पूरे रुपयों को खर्च भी नहीं कर पाया। अंततः हार कर मैंने एयरटेल का सिम लिया जिसमे कभी कोई समस्या नहीं आयी। हालाँकि बाद में एयरटेल को भी छोड़ना पड़ा पर वो कहानी फिर कभी। 

वापस आते हैं। हमारे ऑफिस में जिओ वालों ने एक काउंटर लगाया था। कई बार सोचा कि मैं भी सिम ले लूँ पर भीड़ देख कर हिम्मत नहीं हुई। एक दिन जब वे थोड़ा जल्दी आ गए और ज्यादा भीड़ नहीं थी, मैं फटाफट अपना आधार कार्ड लेकर पहुँच गया। उन्होंने बताया कि आपका आधार कार्ड बिहार का है इसलिए आप बिहार में ही जिओ सिम ले सकते हैं, कलकत्ता में नहीं। बड़ी हैरानी हुई। अरे भाई! फिर आधार कार्ड का अर्थ हीं क्या है? "Aadhaar - one nation one identity" का क्या मतलब हुआ। बहस करने का कोई फायदा नहीं हुआ और मैं वापस आ गया। 

पिछले हफ्ते मैं अपने घर भागलपुर में था। घर से कंपनी का काम करने के लिए इन्टरनेट चाहिए था और वोडाफोन पर 3G बड़ा महँगा पड़ रहा था। सोचा यहाँ जिओ ले लूँ तो समस्या हल हो जाएगी। बहुत खोजा पर कही भी सिम उपलब्ध नहीं था। फिर पता चला कि ब्लैक में सिम मिल सकता है। अरे वाह! अभी तक तो ब्लैक में सिनेमा की टिकटें बिकती थी पर अब सिम कार्ड भी? सोचा थोड़ा खर्चा कर अगर मिल सकता है तो ले ही लेता हूँ। कम से कम महँगे इन्टरनेट से मुक्ति तो मिलेगी। फटाफट "MyJio" ऍप डाउनलोड किया और अपना कोड उपलब्ध हो गया। आधार कार्ड लेकर स्टोर पर पहुँचा। फिंगरप्रिंट दिए और अपना कोड उन्हें दिया। ये क्या? उन्होंने कहा कि आपका कोड किसी ने हैक कर लिया है। मैंने पूछा क्या सचमुच? ये कोड भी हैक होता है? उन्होंने कहा अजी क्या कहें? जिओ की इतनी मारामारी है कि पूछिये मत। मैंने कहा अब क्या उपाय है? उन्होंने कहा कि हम कोई और कोड डाल देंगे पर उसका १०० रुपया अलग से लगेगा। मरता क्या ना करता, कहा डाल दो। तो भाईसाहब ने मेरे वाले सीरीज के कोड्स ट्राय करना शुरू कर दिया। मैंने हँसता हुआ देखता रहा। शायद इसी तरह से कोड हैक किया जाता है। २०-२५ मिनट के अथक परिश्रम के बाद उन्हें एक कोड मिल गया और मुझे मेरा जिओ नंबर। उन्होंने कहा २ घंटों में आपका सिम शुरू हो जायेगा। ५०० रूपये सिम के (ब्लैक में) और १०० रूपये कोड के (जो उसने किसी और का हैक कर लिया) देने पड़े पर मन बड़ा प्रसन्न था। 

घर आया। सिम के एक्टिवेशन का मैसेज आ गया। सिम लगाया तो पता चला कि सिग्नल ही नहीं आ रहा। घर में इधर उधर घूम कर देखा तो अंततः सिग्नल का एक डंडा आया। चलो कुछ तो मिला। फटाफट लैपटॉप कनेक्ट किया पर ब्राऊज़र घूमता ही रहा। स्पीड ऐसी थी कि 2G भी शरमा जाये। बड़ी समस्या थी। बेकार का पैसा चला गया। काम करने के लिए अपने वोडाफोन नंबर को ही इस्तेमाल करना पड़ा। सोचा चलो कोई बात नहीं। इन्टरनेट नहीं चल रहा तो क्या हुआ रोमिंग में मुफ्त फ़ोन तो कर सकूँगा। फ़ोन लगाया तो फ़ोन लगा ही नहीं। यहाँ तक कि जिओ वेरिफिकेशन भी नहीं कर पा रहा था। बड़ा गुस्सा आया। वापस स्टोर गया तो उन्होंने कहा आज भर रुक जाइये कल से चालू हो जायेगा। चलो ये भी ठीक है। अगला दिन आया फिर भी फ़ोन नहीं लगा। फिर स्टोर पहुँचा तो बड़ा क्रन्तिकारी जवाब मिला "आपका इन्टरनेट तो चल रहा है ना? फ़ोन किसी का नहीं लग रहा। आप अभी इन्टरनेट से ही काम चलाइये। वैसे भी मुफ्त में कंपनी और क्या क्या देगी?" जवाब सुनकर बड़ा आश्चर्य हुआ। अरे यार मैंने थोड़े ही बोला था सबकुछ फ्री देने को? पैसे ही ले लेते पर बढ़िया सर्विस तो देते। खैर क्या करता वापस आ गया। जैसे तैसे कछुआ छाप इन्टरनेट को ही इस्तेमाल किया। 

लगातार कोशिश कर रहा था कि कॉल की सेवा शुरू हो जाये। अनंत प्रयासों के बाद आखिर एक बार वैरीफ़िकेशन नंबर मिला और सिम एक्टिवटे हो गया। सोचा चलो एक काम तो हुआ। एक फ्री की कॉल तो बनती है। फ़ोन मिलाया, नहीं मिला। दो बार, तीन बार, चार बार... ३८ बार मिलाने के बाद भी कॉल नहीं लगा तो हिम्मत जवाब दे गयी। दूसरों को कहा उस नंबर पर कॉल करने को तो उन्होंने भी कहा कि मिल ही नहीं रहा। सोचा फ़ोन ही ख़राब हो गया क्या? पर जब वोडाफोन से मिलाया तो तुरंत मिला। एयरटेल, बीएसएनएल, एयरसेल सबको ट्राय किया किसी में कोई समस्या नहीं हुई। जिओ को दुसरे फ़ोन में इस्तेमाल किया तो भी वही समस्या। अंत में मैंने उससे फ़ोन मिलाना ही छोड़ दिया। सोचा जब कलकत्ते जाऊंगा तो बढ़िया 4G सिग्नल मिलेगा और कॉल भी लगेगी। कलकत्ता पहुँचा तो सिग्नल में एक और डंडे की बढ़ोत्तरी हुई पर स्पीड वही 2G वाली। कॉल लगाया तो लगा नहीं। हर बार एक देवीजी नेटवर्क के बिजी होने की सूचना देती थी। हालात तो ये हैं कि कॉल मिलाते ही एक सेकंड के अंदर नेटवर्क बिजी का मैसेज आ जाता है। लगता है जैसे रिकार्डेड मैसेज चला रखा हो। आज सिम को लिए ७ दिन हो चुके हैं और सैकड़ों बार नंबर मिलाने के बाद भी मैं इससे केवल दो कॉल ही कर पाया हूँ। इन्टरनेट के साथ समस्या ये है कि जिओ केवल 4G/LTE बैंड पर ही काम करता है। मतलब ये कि हम तो अपनी स्पीड पे नहीं ही चलेंगे पर अगर आप कम स्पीड पे चलना चाहें तो वो भी हमारे शान के खिलाफ है। कसम से २००९ का दिल्ली वाला वाकया याद आ गया। खैर जो भी हो। एक फ़ालतू सिम के लिए मैं अपना बी.पी. नहीं बढ़ा सकता।

अंततः समझ में आया कि श्री मुकेश अम्बानी हर चीज फ्री क्यों दे रहे थे। अरे भाई अगर कॉल लगेगी ही नहीं तो फ्री ही हुई ना? और श्री नरेंद्र मोदी ने भी शायद बिना सोचे अपना चेहरा और डिजिटल इंडिया का टैग जिओ को दे दिया। एक बार इस्तेमाल तो कर लिया होता श्रीमान। आपने भी कान पकड़ लिए होते। रही बात शाहरुख़ खान साहब की तो उन्हें तो अपना चेहरा (जो मैं तो नहीं देखना चाहता) दिखने के पैसे मिल ही चुके होंगे। ये भी समझ में आ गया कि जनता को मूर्ख बनाने में केवल सरकारी विभाग ही कुशल नहीं है। प्रतिभावान लोगों की कमी थोड़े ही है विश्व में। 

जाते जाते मैं सिर्फ एक बात श्री मुकेश अम्बानी से पूछना चाहूंगा। अगर कोई व्यक्ति विशेषकर महिला विपत्ति में फँस जाये और उसके पास केवल आपका महान जिओ सिम हो तो उसे होने वाली हानि (जो कभी कभी बहुत ही गंभीर हो सकती है) का जिम्मेदार कौन होगा? मेरे विचार में जब कोई भी मुसीबत में हो तो वो कभी भी ये नहीं सुनना चाहेगा - "इस रुट की सभी लाइनें अभी व्यस्त हैं। कृपया थोड़ी देर बाद प्रयास करें।"