Feb 7, 2018

फिल्म समीक्षा: पद्मावत - एक निहायती ही गैर-जिम्मेराना प्रयास

तो आख़िरकार पद्मावती रिलीज़ हो ही गयी। फिल्म को लेकर जो नौटंकी हुई वो किसी से छिपी नहीं है पर यहाँ मैं उसपर बात करने नहीं आया हूँ। वैसे मैं कभी फिल्म समीक्षा लिखता नहीं हूँ पर इस फिल्म के लिखना पड़ रहा है। मैं इस फिल्म का विरोधी था क्यूंकि मुझे पता था कि भंसाली जैसे निर्देशक इतिहास की ऐसी-तैसी किये बगैर तो रहेंगे नहीं। इसकी आशंका मैंने पहले ही अपने पिछले पोस्ट में जाता दी थी जिसे आप यहाँ पढ़ सकते हैं। अब थिएटर में जाकर फिल्म देखने का अर्थ तो भंसाली की कमाई में मदद करना होता। तो फिर कैसे पता किया जाये कि फिल्म का जो विरोध हो रहा है वो सही है या नहीं। बड़ी समस्या थी पर भला हो टोरेंट का जिससे फिल्म देखने का मौका मिला। फिल्म देख कर संतोष हुआ कि मैंने जो आशंका जताई थी वो गलत नहीं थी। कहने को बहुत कुछ है और लेख को भी छोटा रखना है। चलिए पहले ये जानते हैं कि भंसाली ने किस प्रकार जगह-जगह पर राजपूतों और हिन्दुओ को अपमानित करने की कोशिश की है।

Jan 25, 2018

क्या पद्मावत का विरोध केवल रानी पद्मिनी के कारण है?

आज २५ जनवरी है। वैसे तो इस तारीख की कोई विशेष महत्ता नहीं है किन्तु इस वर्ष ये शायद सबसे महत्वपूर्ण दिन बन गया है। पिछले कई महीनों से संजय लीला भंसाली द्वारा निर्देशित फिल्म "पद्मावत" (जो पहले पद्मावती थी) का विवाद गहराता ही जा रहा है। इस फिल्म ने लगभग सारे कांड कर लिए। सबसे अधिक विवादित फिल्म बनने का गौरव हासिल किया, भंसाली को थप्पड़ खाने पड़े, अदृश्य पड़ी करणी सेना को चर्चित कर दिया और लगभग हर क्षेत्र में लोगों को दो गुटों में बाँट दिया। चुकि पहले ही इतना विवाद चल रहा था इसीलिए मैंने इसपर कुछ लिखा नहीं, हालाँकि लिखना बहुत पहले चाह रहा था किन्तु कल से जिस प्रकार की हिंसा भड़की है वो शर्मिंदा कर देने वाली है। हिंसा में जो नुकसान हुआ उससे ना करणी सेना को कोई फर्क पड़ा, ना सरकार को और ना ही भंसाली, दीपिका या रणवीर को जिनकी जेबें पहले से ही भर चुकी है। फर्क पड़ा आम इंसान को और आने वाले दिनों में और फर्क पड़ने की उम्मीद है। खैर इन सब पर चर्चा कभी और भी हो सकती है अभी फ़िलहाल हम अपने मुख्य विषय पर लौटते हैं।

Jan 20, 2018

समझ नहीं आ रहा कि हम किस ओर बढ़ रहे हैं।

दुनिया बड़ी तरक्की कर रही है। हर क्षेत्र में हम केवल आगे ही बढ़ते जा रहे हैं, ऐसा कई लोगों का मानना है। पर मेरी तरह चुनिंदा लोग हैं जो बड़े पशोपेश में है। समझ नहीं आता कि आखिर बढ़ किस ओर रहे हैं। सभी लोग खुद का व्यवसाय शुरू करना चाहते हैं। इसमें कुछ गलत नहीं है, मैं भी ऐसा चाहता हूँ। स्टार्टअप्स का जमाना है इसका मूलभूत सिद्धांत है कि कुछ नया सोचो और नया करो। जिस तरह लोग, खासकर युवा अपने स्टार्टअप्स शुरू कर रहे हैं वो वाकई काबिलेतारीफ़ है। खासकर जब कोई चीज अंधाधुंध होती है तो कई चीजें ऐसी निकल कर सामने आती है जो बड़ी अजीब होती है। पैसे कमाने को कोई हर्ज नहीं पर पैसा कैसे कमाया जा रहा है ये देखना बहुत जरुरी है।

Dec 28, 2017

How to download "Blocked Attachment" by antivirus from Gmail?

I always work on a simple principle - "Keep the things simple". This simple concept always helped me personally and professionally. Recently I have gone through an incident which again proved that the said concept always works.

In 2014, have worked very hard to create a web application. It took me hell lot of time, money and coordination with many software experts. The size of the app was about 12 MB so to keep it safe and for anytime availability, I have kept it in my Gmail.

Today, after 3 years, suddenly I needed that application but when I have opened my Gmail, I was shocked to see the following message: 

Dec 26, 2017

ये वाकई जरुरत है या आदत?

कल रात की बात है। खाना बाहर खाना पड़ा। खाते समय ध्यान गया एक दीन-हीन से दिखने वाले  वृद्ध भिखारी पर। बैंगलोर में आम तौर पर भिखारियों की वेश भूषा इतनी दयनीय नहीं होती पर उसे देखने से लगा जैसे बड़ी मुसीबत में है। मैं आम तौर पर भिखारियों को नजरअंदाज ही करता हूँ किन्तु इसे नहीं कर पाया। मैं खाते हुए उसे देख रहा था जो वहाँ उपस्थित हर एक से कुछ पैसे देने की गुजारिश करता हुआ मेरी ही ओर आ रहा था। मैं भी एक तरह से उसका इंतजार ही कर रहा था कि करीब आये तो कुछ मदद कर दूँ। जब वो मेरे निकट आया तो उसकी दशा को और करीब से देखने का मौका मिला। ह्रदय द्रवित हो गया। सोचा २-५ रूपये में इसका क्या होगा? कुछ और करना चाहिए इसके लिए। तो क्या करूँ? सोचा अधिक नहीं तो कम से कम इस गरीब की एक समय की भूख तो मिटा ही सकता हूँ। सोचा इससे अच्छा कुछ हो नहीं सकता। आखिर कोई भीख क्यों माँगता है? पेट के लिए ही ना? तो इसे भर पेट खाना ही खिला देना चाहिए। कुछ और नहीं तो जब आज अच्छा खाना खा के सोयेगा तो दिल से दुआ देगा।

Sep 21, 2017

Error: The Network Time Protocol service started and then stopped

The Network Time Protocol service is responsible for time sync in all the domain controllers. Among all DCs, the PDC FSMO role holder plays a role of central time server. Have you ever gone through following error:

"The Network Time Protocol service on ServerName started and then stopped. Some services stop automatically if they are not in use by other services or programs."










Aug 28, 2017

फेसबुक का स्तर दिन ब दिन गिरता जा रहा है

दोस्तों, आज मैंने फेसबुक पे कुछ ऐसा झेला है जैसा पहले कभी नहीं देखा। कोई भी बात बताने से पहले मैं ये बताना चाहता हूँ कि मेरा ये पोस्ट केवल मेरे मित्र ही देख सकते हैं। तो अगर आप ये पोस्ट पढ़ सकते हैं तो आप पहले से मेरे फ्रेंड लिस्ट में हैं।